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ये हैं पाइलà¥à¤¸ के कारण, à¤à¤¸à¥‡ करें बचाव और इलाज
देखने में à¤à¤²à¥‡ ही आसान लगे, लेकिन पाइलà¥à¤¸ होने पर बड़ा मà¥à¤¶à¥à¤•िल लगता है बैठने का काम। वैसे अगर कबà¥à¤œ को दूर कर दिया जाठतो पाइलà¥à¤¸ की समसà¥à¤¯à¤¾ होगी ही नहीं।
पेश है पाइलà¥à¤¸ के कारण, बचाव और इलाज पर पूरी जानकारी :
बवासीर या पाइलà¥à¤¸ à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ बीमारी है जिसमें à¤à¤¨à¤¸ के अंदर और बाहरी हिसà¥à¤¸à¥‡ की शिराओं में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से गà¥à¤¦à¤¾ के अंदरूनी हिसà¥à¤¸à¥‡ में या बाहर के हिसà¥à¤¸à¥‡ में कà¥à¤› मसà¥à¤¸à¥‡ जैसे बन जाते हैं, जिनमें से कई बार खून निकलता है और दरà¥à¤¦ à¤à¥€ होता है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ जोर लगाने पर ये मसà¥à¤¸à¥‡ बाहर की ओर आ जाते है। अगर परिवार में किसी को à¤à¤¸à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ रही है तो आगे की जेनरेशन में इसके पाठजाने की आशंका बनी रहती है।
पाइलà¥à¤¸ और फिशर का फरà¥à¤• जानें कई बार पाइलà¥à¤¸ और फिशर में लोग कंफà¥à¤¯à¥‚ज हो जाते हैं। फिशर à¤à¥€ गà¥à¤¦à¤¾ का ही रोग है, लेकिन इसमें गà¥à¤¦à¤¾ में कà¥à¤°à¥ˆà¤• हो जाता है। यह कà¥à¤°à¥ˆà¤• छोटा सा à¤à¥€ हो सकता है और इतना बड़ा à¤à¥€ कि इससे खून आने लगता है।
पाइलà¥à¤¸ की चार सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œà¤—à¥à¤°à¥‡à¤¡ 1 : यह शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ होती है। इसमें कोई खास लकà¥à¤·à¤£ दिखाई नहीं देते। कई बार मरीज को पता à¤à¥€ नहीं चलता कि उसे पाइलà¥à¤¸ हैं। मरीज को कोई खास दरà¥à¤¦ महसूस नहीं होता। बस हलà¥à¤•ी सी खारिश महसूस होती है और जोर लगाने पर कई बार हलà¥à¤•ा खून आ जाता है। इसमें पाइलà¥à¤¸ अंदर ही होते हैं। गà¥à¤°à¥‡à¤¡ 2: दूसरी सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ में मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— के वकà¥à¤¤ मसà¥à¤¸à¥‡ बाहर की ओर आने लगते हैं, लेकिन हाथ से à¤à¥€à¤¤à¤° करने पर वे अंदर चले जाते हैं। पहली सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में इसमें थोड़ा जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दरà¥à¤¦ महसूस होता है और जोर लगाने पर खून à¤à¥€ आने लगता है। गà¥à¤°à¥‡à¤¡ 3 : यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ थोड़ी गंà¤à¥€à¤° हो जाती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसमें मसà¥à¤¸à¥‡ बाहर की ओर ही रहते हैं। हाथ से à¤à¥€ इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अंदर नहीं किया जा सकता है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में मरीज को तेज दरà¥à¤¦ महसूस होता है और मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— के साथ खून à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ आता है। गà¥à¤°à¥‡à¤¡ 4 : गà¥à¤°à¥‡à¤¡ 3 की बिगड़ी हà¥à¤ˆ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ होती है। इसमें मसà¥à¤¸à¥‡ बाहर की ओर लटके रहते हैं। जबरà¥à¤¦à¤¸à¥à¤¤ दरà¥à¤¦ और खून आने की शिकायत मरीज को होती है। इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के चांस बने रहते हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ हैं लकà¥à¤·à¤£ - मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— करते वकà¥à¤¤ तेज चमकदार रकà¥à¤¤ का आना या मà¥à¤¯à¥‚कस का आना। - à¤à¤¨à¤¸ के आसपास सूजन या गांठसी महसूस होना। - à¤à¤¨à¤¸ के आसपास खà¥à¤œà¤²à¥€ का होना। - मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— करने के बाद à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ लगते रहना जैसे पेट साफ न हà¥à¤† हो। - पाइलà¥à¤¸ के मसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में सिरà¥à¤« खून आता है, दरà¥à¤¦ नहीं होता। अगर दरà¥à¤¦ है तो इसकी वजह है इंफेकà¥à¤¶à¤¨à¥¤
कारण कà¥à¤¯à¤¾ हैं - कबà¥à¤œ पाइलà¥à¤¸ की सबसे बड़ी वजह होती है। कबà¥à¤œ होने की वजह से कई बार मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— करते समय जोर लगाना पड़ता है और इसकी वजह से पाइलà¥à¤¸ की शिकायत हो जाती है। - à¤à¤¸à¥‡ लोग जिनका काम बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देर तक खड़े रहने का होता है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पाइलà¥à¤¸ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। - गà¥à¤¦à¤¾ मैथà¥à¤¨ करने से à¤à¥€ पाइलà¥à¤¸ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। - मोटापा इसकी à¤à¤• और अहम वजह है। - कई बार पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान à¤à¥€ पाइलà¥à¤¸ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। - नॉरà¥à¤®à¤² डिलिवरी के बाद à¤à¥€ पाइलà¥à¤¸ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
इलाज के तरीके
1. à¤à¤²à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¥€
दवाओं सेः अगर पाइलà¥à¤¸ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 1 या 2 के हैं तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दवाओं से ही ठीक किया जा सकता है। सरà¥à¤œà¤°à¥€ की जरूरत नहीं होती। à¤à¤¨à¥‹à¤µà¥‡à¤Ÿ और फकटू पाइलà¥à¤¸ पर लगाने की दवाà¤à¤‚ हैं। इनमें से कोई à¤à¤• दवा दिन में तीन बार पाइलà¥à¤¸ पर लगाई जा सकती है। इन दवाओं को डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पूछकर ही लगाना चाहिà¤à¥¤
ऑपरेशनरबर बैंड लीगेशन (Rubber Band Ligation) अगर मसà¥à¤¸à¥‡ थोड़े बड़े हैं तो रबर बैंड लीगेशन का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जाता है। इसमें मसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ की जड़ पर à¤à¤• या दो रबर बैंड को बांध दिया जाता है, जिससे उनमें बà¥à¤²à¤¡ का पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ रà¥à¤• जाता है। इसमें डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤¨à¤¸ के à¤à¥€à¤¤à¤° à¤à¤• डिवाइस डालते हैं और उसकी मदद से रबर बैंड को मसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ की जड़ में बांध दिया जाता है। इसके बाद à¤à¤• हफà¥à¤¤à¥‡ के समय में ये पाइलà¥à¤¸ के मसà¥à¤¸à¥‡ सूखकर खतà¥à¤® हो जाते हैं। à¤à¤¨à¥ˆà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ देने की जरूरत नहीं होती। à¤à¤• बार में दो-तीन मसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ को ही ठीक किया जाता है। इसके बाद मरीज को दोबारा बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ जाता है। इसमें à¤à¥€ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ होने की जरूरत नहीं होती। इस पà¥à¤°à¥‰à¤¸à¥‡à¤¸ को करने के 24 से 48 घंटे के à¤à¥€à¤¤à¤° मरीज को दरà¥à¤¦ महसूस हो सकता है, जिसके लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° दवाà¤à¤‚ दे देते हैं।
सà¥à¤•लरोथेरपी (Sclerotherapy) इस तरीके का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² तà¤à¥€ किया जाता है जब मसà¥à¤¸à¥‡ छोटे होते हैं। सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 1 या 2 तक इस तरीके का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। इसमें मरीज को à¤à¤• इंजेकà¥à¤¶à¤¨ दिया जाता है। इससे मसà¥à¤¸à¥‡ सिकà¥à¤¡à¤¼ जाते हैं और उसके बाद धीरे-धीरे शरीर के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ ही अबà¥à¤œà¥‰à¤°à¥à¤¬ कर लिठजाते हैं। अगर मसà¥à¤¸à¥‡ बाहर आकर लटक गठहैं तो इस तरीके का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² नहीं किया जाता। इसमें असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ होने की जरूरत नहीं होती। डे केयर पà¥à¤°à¥‰à¤¸à¥‡à¤¸ है यानी असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ होने की जरूरत नहीं होती।
हेमरॉयरडकà¥à¤Ÿà¤®à¥€ (Haemorrhoidectomy) मसà¥à¤¸à¥‡ अगर बहà¥à¤¤ बड़े हैं और दूसरे तरीके फेल हो चà¥à¤•े हैं तो यह पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अपनाई जाती है। यह सरà¥à¤œà¤°à¥€ का परंपरागत तरीका है। इसमें अंदर के या बाहर के मसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ को काटकर निकाल दिया जाता है। इसमें असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ होने की जरूरत होगी। जनरल या सà¥à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨ à¤à¤¨à¥ˆà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ दिया जाता है। रिकवरी में दो से तीन हफà¥à¤¤à¥‡ का समय लग सकता है। सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद कà¥à¤› दरà¥à¤¦ महसूस हो सकता है। सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद पहली बार मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— में कà¥à¤› खून आ सकता है। सरà¥à¤œà¤°à¥€ कामयाब है और कोई रिसà¥à¤• नहीं है, लेकिन सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद à¤à¥€ यह जरूरी है कि मरीज अपने लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² में बदलाव करे, कबà¥à¤œ से बचे और फाइबर डाइट ले। à¤à¤¸à¤¾ न करने पर करीब 5 फीसदी मामलों में सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद à¤à¥€ पाइलà¥à¤¸ दोबारा हो सकते हैं।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤ªà¤²à¤° सरà¥à¤œà¤°à¥€ (Stapler Surgery) सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 3 या 4 के पाइलà¥à¤¸ के लिठही इस तरीके का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में à¤à¥€ जनरल, रीजनल और लोकल à¤à¤¨à¥ˆà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ दिया जाता है। असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ होना पड़ता है। पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤ªà¥à¤¸à¥à¤¡ पाइलà¥à¤¸ (बाहर निकले हà¥à¤ मसà¥à¤¸à¥‡) को à¤à¤• सरà¥à¤œà¤¿à¤•ल सà¥à¤Ÿà¥‡à¤ªà¤² के जरिये वापस अंदर की ओर à¤à¥‡à¤œ दिया जाता है और बà¥à¤²à¤¡ सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ को रोक दिया जाता है जिससे टिशà¥à¤¯à¥‚ सिकà¥à¤¡à¤¼ जाते हैं और बॉडी उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अबà¥à¤œà¥‰à¤°à¥à¤¬ कर लेती है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में हेमरॉयरडकà¥à¤Ÿà¤®à¥€ के मà¥à¤•ाबले कम दरà¥à¤¦ होता है और रिकवरी में वकà¥à¤¤ à¤à¥€ कम लगता है।
2. होमà¥à¤¯à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¥€ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 1 और सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 2 के पाइलà¥à¤¸ के लिठहोमà¥à¤¯à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¥€ में बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¤¾ इलाज है और कई मामलों में सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 3 के पाइलà¥à¤¸ को à¤à¥€ इसकी मदद से ठीक किया जा सकता है। पाइलà¥à¤¸ के बहà¥à¤¤ कम मामले à¤à¤¸à¥‡ होते हैं, जिनमें सरà¥à¤œà¤°à¥€ की जरूरत होती है। बाकी पाइलà¥à¤¸ दवाओं से ही ठीक हो सकते हैं। साथ ही शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ के पाइलà¥à¤¸ में à¤à¤•दम सरà¥à¤œà¤°à¥€ की ओर जाने से बचना चाहिà¤à¥¤ इंतजार करें, दवा लें और बचाव के तरीकों पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें। à¤à¤• से दो महीने तक लगातार इलाज कराने से पाइलà¥à¤¸ की समसà¥à¤¯à¤¾ को जड़ से खतà¥à¤® किया जा सकता है। पाइलà¥à¤¸ के साथ अकà¥à¤¸à¤° यह समसà¥à¤¯à¤¾ होती है कि à¤à¤• बार ठीक होने के बाद ये दोबारा हो जाते हैं। इस समसà¥à¤¯à¤¾ के लिठहोमà¥à¤¯à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¥€ में अलग से दवा दी जाती है। अलग-अलग लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के हिसाब से नीचे दी गई दवाà¤à¤‚ दी जा सकती हैं। दवा की चार चार गोली दिन में तीन बार ले सकते हैं : - अगर पाइलà¥à¤¸ के साथ कमर दरà¥à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ है तो Aesculous 30 - अगर पाइलà¥à¤¸ का साइज बड़ा है मसलन अंगूर के साइज का है तो Aloes 30 ली जा सकती है। - पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान होने वाले पाइलà¥à¤¸ के लिठCollin Sonia 30 ली जा सकती है। यह रामबाण दवा है। - अगर पाइलà¥à¤¸ में तेज दरà¥à¤¦ है और बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग à¤à¥€ हो रही है तो Hamammelis 30 ले सकते हैं। - अगर बार-बार पाइलà¥à¤¸ हो जाते हैं तो Thuja 200 की à¤à¤• डोज हर हफà¥à¤¤à¥‡ ली जा सकती है। सà¥à¤¬à¤¹ खाली पेट हफà¥à¤¤à¥‡ में à¤à¤• दिन 4-6 गोली ले सकते हैं। पांच हफà¥à¤¤à¥‡ तक ले लें। - Sulphur 30 à¤à¥€ कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• पाइलà¥à¤¸ में काफी यूज की जाती है।
3. आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦
दवाओं से नीचे दी गई दवाओं में से कोई à¤à¤• ली जा सकती है। रोज रात को à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š तà¥à¤°à¤¿à¤«à¤²à¤¾ गरà¥à¤® पानी से लें। इसे लेने के बाद कोई और चीज न खाà¤à¤‚। रोज रात को ईसबगोल की à¤à¥à¤¸à¥à¤¸à¥€ à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š गरà¥à¤® दूध से लें। पंचसकार चूरà¥à¤£ à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š रोज रात को गरà¥à¤® पानी से लें। अशोरà¥à¤˜à¤¨à¥€ वटी की दो गोली सà¥à¤¬à¤¹ शाम खाना खाने के बाद पानी से लें। अà¤à¤¯à¤¾à¤°à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ या कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ आसव खाने के बाद चार चमà¥à¤®à¤š आधा कप सादा पानी में मिलाकर लें। मसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ पर लगाने के लिठसà¥à¤¶à¥à¤°à¥à¤¤ तेल आता है। इसे मसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ पर लगा सकते हैं। सूजन और दरà¥à¤¦ है तो सिकाई की मदद से सकते हैं। इसके लिठà¤à¤• टब में गरà¥à¤® पानी ले लें और उसमें à¤à¤• चà¥à¤Ÿà¤•ी पौटेशियम परमेंगनेट डाल दें। यह सिकाई हर मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— के बाद करें। कà¥à¤·à¤¾à¤°à¤¸à¥‚तà¥à¤° सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 2, 3 या 4 के पाइलà¥à¤¸ के लिठआयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में कà¥à¤·à¤¾à¤°à¤¸à¥‚तà¥à¤° चिकितà¥à¤¸à¤¾ की जाती है। इसका तरीका नीचे दिया गया है। - इसमें à¤à¤• धागे का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जाता है। कà¥à¤› आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• दवाओं का यूज करके डॉकà¥à¤Ÿà¤° इस धागे को बनाते हैं। - इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को करने से पहले लोकल à¤à¤¨à¥ˆà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ दिया जाता है। डे केयर पà¥à¤°à¥‰à¤¸à¥‡à¤¸ होता है और इसमें असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ होने की जरूरत नहीं होती। - पà¥à¤°à¥‰à¤¸à¥‡à¤¸ शà¥à¤°à¥‚ करने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤• यंतà¥à¤° के जरिये पाइलà¥à¤¸ को देखते हैं और उसके बाद इस मेडिकेटेड धागे को मसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ से बांध देते हैं। मसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ की जड़ में à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ जगह होती है जहां दरà¥à¤¦ नहीं होता। इसी जगह पर इस धागे को बांध दिया जाता है। इसके बाद मसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ को अंदर कर दिया जाता है और धागा बाहर की ओर ही लटका रहता है। इसके बाद मरीज को घर à¤à¥‡à¤œ दिया जाता है। इस तरीके से पाइलà¥à¤¸ ठीक होने में दो हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का वकà¥à¤¤ लग जाता है। बाहर की ओर लटके धागे के जरिये दवाओं को इंजेकà¥à¤Ÿ किया जाता है, जिससे मसà¥à¤¸à¥‡ सूखकर गिर जाते हैं। इन दो हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के à¤à¥€à¤¤à¤° डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤•-दो बार मरीज को देखने के लिठबà¥à¤²à¤¾à¤¤à¥‡ हैं और तय करते हैं कि सब ठीक चल रहा है। इन दो हफà¥à¤¤à¥‡ के दौरान मरीज को कà¥à¤› दवाà¤à¤‚ दी जाती हैं और उससे à¤à¤¸à¥€ डाइट लेने को कहा जाता है, जिससे कबà¥à¤œ न हो। कà¥à¤› à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ à¤à¥€ बताई जाती हैं। - डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤¸à¤¾ दावा करते हैं कि इस तरीके से इलाज के बाद पाइलà¥à¤¸ के दोबारा होने की आशंका खतà¥à¤® हो जाती है। - अगर दरà¥à¤¦ है तो à¤à¤¸à¤¾ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की वजह से हो सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में पहले दवा देकर इंफेकà¥à¤¶à¤¨ ठीक किया जाता है। उसके बाद ही कà¥à¤·à¤¾à¤°à¤¸à¥‚तà¥à¤° चिकितà¥à¤¸à¤¾ की जाती है। - इस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में कई à¤à¥‹à¤²à¤¾à¤›à¤¾à¤ª डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¥€ हैं जो कà¥à¤·à¤¾à¤°à¤¸à¥‚तà¥à¤° से इलाज करने का दावा करते हैं। इनसे बचें। कà¥à¤·à¤¾à¤°à¤¸à¥‚तà¥à¤° अगर करा रहे हैं तो उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ से कराà¤à¤‚, जिनके पास à¤à¤®à¤à¤¸ आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ की डिगà¥à¤°à¥€ है।
4. डाइट पाइलà¥à¤¸ से बचने और अगर है तो उससे जलà¥à¤¦ छà¥à¤Ÿà¤•ारा पाने के लिठयह खाà¤à¤‚ : - जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सेवन करें। हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¥€ खाà¤à¤‚। मटर, सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार की फलियां, शिमला मिरà¥à¤š, तोरी, टिंडा, लौकी, गाजर, मेथी, मूली, खीरा, ककड़ी, पालक। कबà¥à¤œ से राहत देने के लिठबथà¥à¤† अचà¥à¤›à¤¾ होता है। - पपीता, केला, नाशपाती, अंगूर, सेब खाà¤à¤‚। मौसमी, संतरा, तरबूज, खरबूजा, आड़ू, कीनू, अमरूद बहà¥à¤¤ फायदेमंद हैं। - जिस गेहूं के आटे की रोटी खाते हैं, उसमें सोयाबीन, जà¥à¤µà¤¾à¤°, चने आदि का आटा मिकà¥à¤¸ कर लें। इससे आपको जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फाइबर मिलेगा। - टोंड दूध ही पीà¤à¤‚। शरà¥à¤¬à¤¤, शिकंजी, नींबू पानी या लसà¥à¤¸à¥€ ले सकते हैं। - दिन में कम से कम 8 गिलास पानी जरूर पिà¤à¤‚।
यह न खाà¤à¤‚ - फासà¥à¤Ÿ फूड, जंक फूड और मैदे से बनी खाने की चीजें। - चावल कम खाà¤à¤‚। - सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में à¤à¤¿à¤‚डी, अरबी, बैंगन न खाà¤à¤‚। - राजमा, छोले, उड़द, चने आदि। - मीट, अंडा और मछली। - शराब, सिगरेट और तंबाकू से बचें। यह à¤à¥€ रहे याद - ढीले अंडरवेयर पहनें। लंगोट आदि पहनना नà¥à¤•सानदायक हो सकता है। - मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— के दौरान जोर लगाने से बचें। - कोशिश करें कि मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— का काम दो मिनट के à¤à¥€à¤¤à¤° पूरा करके आ जाà¤à¤‚। - टॉयलेट में बैठकर कोई किताब या पेपर पढ़ने की आदत से बचें। - हो सके तो इंडियन सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² वाले टॉयलेट का ही यूज करें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसमें बैठने का तरीका à¤à¤¸à¤¾ होता है कि पेट आसानी से साफ हो जाता है।
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